“If you don’t want mental hydration then think about water conservation.”

गगास घाटी के गॉव ग्राम सभा थामण इड़ा सेरा कनलगॉव के समस्त ग्रामीणो खासकर महिला शक्ति व बालिकाओं ने श्रम दान करके नौला धारा जैव विविधता को बचाने के लिये सामाजिक सहभागिता की एक नयी मिशाल पेश की है आज कभी पानी की भयंकर कमी से जुझ रहे ग्रामीण अब वर्षाजल संचयन के साथ साथ पुन: रिचार्ज हुए परम्परागत नौले धारों को पुन: प्रयोग मै ला रहे है ।

जिला अल्मोड़ा, विकास खंड सल्ट, तहसील भिकियासैण, के ग्राम सनकणा के ग्राम प्रधान श्री जीतेन्द्र सिंह घुघत्याल जी के सफल नेतृत्व में पहाड़-पानी-परम्परा को पुनर्स्थापित करने के लिए गांव के सभी युवा शक्ति नौला मित्रों ने श्रमदान करके गांव के सभी जल स्रोतों पौराणिक नौले धारे के आसपास की जैव विविधता को पुनर्स्थापित करने के लिए सामाजिक सहभागिता दिखाई I

जैव विविधता की सुरक्षा और संरक्षण के तरीकों को साझा करते थपलिया मेहरा गांव,  जिला नैनीताल में तीन मिश्रित जैव विविधता वनों विकसित करने वाले नौला सदस्य एवं वर्तमान नगर पंचायत सभासद ललित सिह मेहरा जी का कहना है कि आज लोगों को इस मुद्दे के बारे में संवेदनशील बनाने की आवश्यकता है, नौला फाउंडेशन के मुख्य संरक्षक श्री किशन चंद भट्ट, बताते है कि जैव विविधता के संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया गया है 

विकास खंड भीमताल जिला-नैनीताल के ग्राम सिलौटी में निवासरत नौला फाउंडेशन सदस्य एस.एस.बी. से रिटार्यड इन्सपेक्टर रघुवर दत्त पंत जो घंटा देवी मंदिर के प्रधान पुजारी भी हैं बताते है कि वास्तव में मानव सभ्यता के विकास की धुरी जैव-विविधता मुख्यतः आवास विनाश, आवास विखण्डन, पर्यावरण प्रदूषण, विदेशी मूल के वनस्पतियों के आक्रमण, अतिशोषण, वन्य-जीवों का शिकार, वनविनाश, अति-चराई बीमारी आदि के कारण खतरे में है। 

पानी की आवाज सुनो! 2030

The current scientific conservation methods along will not be adequate for the revival of the ecosystems unless these are easily implementable and the cooperation between the environmentalists and the community is developed. This summit would mainly focus on the basic issues which could be solved by the grassroots level solutions in cooperation with the communities itself.

Naula Ganga Channel

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