P.S.Baneshi 23 Aug

P.S.Baneshi

आज पूरा विश्व जिस संकट की आशंका से चिंतित है उसने हमारे दरवाजे पर दस्तक दे दी है. प्रकृति का क्रोध प्रत्यक्ष रूप से हमै विश्व के भिन्न भिन्न भागौ मै साफ तौर पर दिखाई दे रहा है. हमारे बुद्धिजीवी वैज्ञानिक पर्यीवरणविद भूगर्भशास्तृि हमै सालौ से चेता रहे है पर हम लापरवाह बने रहे. वे लोग अपने स्तर पर जितना कर सकते है कर रहे है. पर यह काफी नही है.
आज विभिन्न वैश्विक सस्थांये, सरकारै व विभिन्न समाज सेवी सस्थांये अपने स्तर पर कार्यरत है
परन्तु मानव सभ्यता पर आया यह सकंट बहुत बडा है और इससे लडने के लिये हम सब को अपने अपने स्तर पर कार्य करने की जरूरत है. सरकारै समाज सेवी सस्थांये और सब जगह तक नही पहुँच सकते. हम सब को अपने अपने क्षेत्र मै ग्राम स्तर पर क्षेत्रीय सस्थाऔ के सहयोग से इस कार्य को करना चाहिये. जब तक हम इसे जन आन्दोलन बना कर जमीनी स्तर तक नही पहुँचायेगे यह एक बहुत ही मुश्किल कार्य है.
आज ग्राम स्तर पर लोगों को जागृत करने की जरूरत है. हम कब तक सहायता के लिये सरकार का या सामाजिक सस्थाऔ का इंतजार करते रहैगे. अपनी समस्याऔ का समाधान हमै खुद ही
करना पड़ेगा. हां हमै क्षेत्रीय स्तर पर कार्यरत सरकारी अधिकारी, समाज सेवी सस्थांये और प्रबुद्ध लोगौ का सहयोग लेना पड़ेगा. और नौला फाउंडेशन तो हमारे साथ है ही.
मेरी समझ मै मोटी मोटी ये बात आ रही है कि global warming ने पूरे विश्व का मौसम चक्र बिगाड़ दिया है. और global warming की वजह तो हम सब ही जीनते है कि विकास की दौड़ मै भारी औद्योगिक करण और पेड़ों की अन्धाधुन्ध कटाइ है. और मौसम चक्र के इस बिगड़ने के कई साइड अफैक्ट। भी हुए है जिसमें कि पृथ्वी का जल स्तर गिरना भी एक है. जिसकी वजह आज पूरे विश्व।मैं पेय जल की समस्या पैदा हो गयी है. मौसम चक्र के बिगड़ने से पेयजल के पृाकतिक जल सृोत। स्वत: रिचाृज नहीं हो पाते.
पृकृति ने मनुष्य व सभी जीव जन्तुऔ के लिए बहुत ही सुंदर जीवन चक्र का निर्माण किया था. सभी आवश्यक जीवन दायी चीजै जैसे हवा पानी आदि मौसम व रितु परिवर्तन द्वारा स्वतः शुद्धि करण के चक्र मै बधे थे, परंतु हमने इस चक्र को बिगाड़ दिया.इसीलिए आज हमे पृकृति के क्रोध का सामना करना पड रहा है.खैर अभी सब कुछ खत्म नहीं हुआ है. किन्तु हमै शीघ्र ही इस दिशा मै कार्य करने हौगे.मेरी समझ मै तो त्वरित उपाय जो कि हम कर सकते है यही है कि हम अधिक से अधिक पेड़ लगाये और पेड़ों की कटाई को रोकने की कोशिश करे.यह तो सिर्फ पर्यावरण का सन्तुलन बनाने का कार्य करेगा.
परंतु हमारे सामने एक और गंभीर समस्या है और वह है पेय जल की. और इस समस्या को हम काफी कुछ दूर कर सकते है अपने पृाकतिक जल सृोतो को पुनर्जीवित करके.
और इस बात को नौला फाउंडेशन ने सही तरीके से समझा है और वह अपने स्तर पर पूरे जोश से बुद्धिजीवियौ वैज्ञानिकौ के मार्गदर्शन और क्षेत्रीय सस्थाऔ के सहयोग से वृहद स्तर पर कार्यरत है.
नौला फाउंडेशन को बहुत से बुद्धिजीवी वैज्ञानिक पर्यावरणविदौ का मार्गदर्शन प्राप्त है और उन्हें क्षेत्रीय स्तर पर भी विभिन्न ग्रामीण सस्थाऔ का सहयोग प्राप्त है. इसीलिए नौला फाउंडेशन ने कई जगह इस तरह के कार्यक्रमौ का सफल संचालन किया है
अपने पृाकतिक जल सृोतौ को पुनर्जीवित करने के लिए हमै उसके आसपास उपरी क्षेत्र मै गहन वृक्षारोपण करना पड़ेगा. ऐसे पेड़ जो कि अपने आसपास के वातावरण को ठंडा रख कर बारिश को आकर्षित कर सके और फिर जिसकी जडै पानी को भी रोक सके.इस तरह उस जल सृोत को पुनर्जीवित होने मै एक दो साल तो जरूर लगेंगे पर वह दीर्घकालिक होगा।इस तरह हम पर्यावरण के सन्तुलन मै भागीदार हौगे और अपनी पेय जल की समस्या को भी दूर कर पायेगें, साथ ही साथ इससे मिट्टी और पहाड़ों का कटीव भी रुकेगा.
वैसे तो हम सभी कही भी कभी भी पेड़ लगा सकते है और पर्यावरण संशोधन मैं अपना योगदान दे सकते है. किन्तु यदि हम अपने विलुप्त पेय जल सोृतौ को पुनर्जीवित करना चाहते है तो हमें ये कार्य किसी ऐसी संस्था के सहयोग और मार्ग दर्शन मै करना चाहिए जिसे इसका अनुभव हो. क्योंकि इसके लिए ये आवश्यक है कि हम ये समझ सकै कि कौन सा जल सोृत पुनर्जीवित किया जा सकता है और कौन सा नही. कहां हमें पेड़ लगाने है और कौन से लगाने है. इसकी एक वैज्ञानिक पृकिृया होती है.
और मै समझता हूँ कि नौला फाउंडेशन के पास इस का अच्छा अनुभव है और उनके technical team मै कई अनुभवी और निपुण कार्य कर्ता है. हमें उनका सहयोग अवश्य लेना चाहिए.
इसके साथ ही मै सभी मित्र गणौ से निवदन करूगा कि इस मुहिम मै जुड कर अपनी भावी पीडी को एक नायाब तोहफा दै. जै हिंद