अनिल  कुमार  यादव 14 Aug

अनिल कुमार यादव

सभी माननीय का अभिवादन ।।
नौला फाउंडेशन, उत्तराखंड में  हिमालयी जैव विविधता, प्राकृतिक जल स्रोतों, जमीन, जंगल, एवं भूजल सरंक्षण, संवर्धन एवं शोध (रिसर्च) पर मध्य हिमालयी क्षेत्र के गांवो से उत्तराखंड राज्य में प्रतिबद्धता के साथ क्षेत्र के निवासियों के सहयोग और भागीदारी से मृतप्राय पेयजल स्रोतों के पुनर्निर्माण, संरक्षण, संवर्द्धन और निरंतर विकास के लिए हमारी संस्था समर्पित भाव से काम करने का संकल्प कर रही हैं ये बहुत गर्व की बात हैं
उत्तराखंड में विशेषतः पर्वतीय जनपदों में पेयजल के स्रोत नौलों, धारों (झरनों) और गधेरों आदि के रूप मे हैं।अधिकतर जगहों पर भूमिगत जल का दोहन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण संभव नही है ।प्रदेश में प्राकृतिक पेयजल स्रोतों के स्राव  में निरंतर कमी आ रही है ।अनेक स्रोतों के क्षतिग्रस्त होने और सूख जाने के कारण पानी का संकट गहराता जा रहा है । अतः यह नितांत आवश्यक है कि उन्हें बचाया जाए और वैज्ञानिक ढंग से उपचारित कर पुनर्जीवित किया जाए।
हम अपने चारों ओर कृतिम वातावरण में जी रहे होते है , हमारे पास खुद के लिए समय पर्याप्त नही होता, हम खुद में इतना खोये होते है कि हमे अपनी विरासत या पृथ्वी की ममता या एक वृक्ष का जीवनदायिनी प्रेम, अथवा पशु पक्षियों का कलरव संगीत, नदियों का कलकल निनाद स्पर्श ही नही करता ।हम खुद ही सचेत नही है खुद के प्रति। पर्यावरण का सही अर्थ क्या है ?? ये प्रश्न है ! संछेप में जिसने हमे चारो ओर से आच्छादित कर रखा है, घेर रखा है उसे पर्यावरण कहते है, पर यक्ष प्रश्न वहीं खड़ा है ?? क्या हम खुद सजग है ??ये जीवन अमूल्य है, ये हमारी सांसे इसी पर्यावरण से मिल रही है,  एक कृतिम वातावरण में खुद को छुपा रखा है। खुद की सांसे उधार है इस पृकृति पर , क्या हम इसका कर्ज चुका सकते है, इस जीवन में, क्या हम इस पंच तत्व जो कि बिल्कुल मुफ्त मिला है हमें , आकाश, पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि, का कर्ज चुका सकते है ?? क्या ये प्रश्न हम सभी मनुष्यों का नहीं है??
?? अब प्रश्न है क्या किया जाए??यदि सचमुच आप चाहते है इस दिशा में सहयोग देना, तो खुद से शुरुआत करनी होगी।  खुद को पूरा बदलना होगा, एक नई दिशा खुद को देंनी होगी, अपनी आदतें बदलनी होगी, स्वयं को समय देना होगा, स्वमं बदलना होगा।।
 माना कि ये कठिन होगा, पर यदि हम मनुष्यों को इस जीवन मे कुछ भी अच्छा करना है, तो पहले खुद से शुरुआत करनी ही होगी। पर्यावरण को बचाने के लिए यह हमारे जागने का वक्त है. सिर्फ जागने का ही नहीं कुछ करने का भी. इसके लिए जरूरी है कि हम पेड़ लगाएं. पर्यावरण संरक्षण के लिए यही सबसे सरल रास्ता है जो खुद हमसे शुरू होता है. प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवनकाल में कम-से-कम एक पौधा अवश्य लगाए, साथ ही पेड़ बनने तक उसकी देखभाल भी करे. आज हमारे द्वारा की गई यह छोटी सी पहल, बढ़ते हुए पेड़ के साथ कल हमारा गर्व बन जाएगी. साथ ही आने वाली पीढि़यों को हम दें सकेंगे हरा-भरा वातावरण विरासत के रूप में.
तो आइए आज एक संकल्प लें स्वयं से एक नई शुरुआत करें और नौला फाउंडेशन द्वारा षुरे कोई इस पवित्र कार्य में अपना अपना सहयोग दे ।।                      ………………..
एक बार पुनः आप सभी का आभार !