मनोहर सिंह भण्डारी 22 Aug

मनोहर सिंह भण्डारी

*जलैव जीवनम्*: *जल ही जीवन है* इस सत्य को स्वीकार करते हुए निरंतर तेजी से बढ़ती आबादी,भूजल का अविवेक पूर्ण दोहन, बर्बादी और क्षीण या लुप्त होते स्रोत चिन्ता का विषय हैं। भूजल के स्तर में लगातार हो रही गिरावट और उपलब्धता में कमी सभी प्राणियों और वनस्पतियों के लिए भविष्य में आने वाले संकट की ओर इशारा कर रहे हैं।
प्राचीन काल में सभ्यताओं का विकास जल स्रोतों या नदी तटों के आसपास हुआ है ।उत्तराखंड के पर्वतीय भूभाग में नौला,तालाब, चाल,खाल का निर्माण कर हमारे पूर्वजों ने विवेकपूर्ण ढंग से अपनी जल सम्बन्धी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए पर्याप्त संवर्धन और संरक्षण किया। कालांतर में भूजल का मशीनों से दोहन कर तथा नदियों में बाँध बना कर नलों द्वारा गांव गांव में पानी पहुंचाने का काम सरकारों ने किया,लेकिन पुराने पारम्परिक जल स्रोत देखभाल और संरक्षण के अभाव में मृतप्राय हो गए। पलायन और विस्थापन का एक कारण पानी भी है ।आज नौले का विकल्प नल तो बना है, परन्तु बहुत तेजी से गिरते जलस्तर ने पुनः पारंपरिक स्रोतों ओर ध्यान खींचा है ।
*नौला* एक खनिजयुक्त शुद्ध प्राकृतिक रूप से स्रावित जल का भण्डार है जिसकी बनावट सीढ़ीनुमा कुंए की तरह होती है। यह ऊपर से पूर्ण रूप से आच्छादित होता है ताकि वर्षाजल और जानवर इसमें प्रवेश न कर सकें। इसका जल संक्रमण विहीन और सुपाच्य होता है ।
*नौला फाउंडेशन* एक रजिस्टर्ड गैर-लाभकारी, सामाजिक संस्था है, जिसके समर्पित स्वयंसेवक प्रतिबद्धता के साथ जमीनी स्तर पर समाज को जोड़ कर समाधान खोजने का प्रयास कर रहे हैं। यह संस्था अंतर्राष्ट्रीय मानकों और दिशानिर्देशों के अनुसार पारिस्थितिक तंत्र को बचाने की दिशा में अग्रसर है।
एक कोर टीम नेतृत्व प्रदान करती है, रणनीति विकसित करती है और प्राकृतिक भूजल स्तर और पर्यावरण की बहाली सहित पारिस्थितिकी तंत्र की निगरानी, ​​संरक्षण, पुनरुद्धार, रिचार्ज और संरक्षण के लिए प्रभावी प्रबंधन, कार्यान्वयन और मूल्यांकन सुनिश्चित करती है।
नौला स्वयंसेवकों के मार्गदर्शन के लिए नेतृत्व वैज्ञानिक, पारिस्थितिक विज्ञानी, भूविज्ञानी और जलविज्ञानी समेत बुद्धिजीवियों की एक टीम है जो नौला के लक्ष्यों के मूल्यांकन के लिए प्रभावी प्रबंधन, कार्यान्वयन और नियमित निगरानी का मापदंड सुनिश्चित करती है और रणनीति विकसित करती है ।प्राकृतिक संसाधनों के पुनर्जीवन,संवर्धन और संरक्षण के लिए टीम, भूजल स्तर के रखरखाव और प्राकृतिक पर्यावरण की बहाली की दिशा में गम्भीरता के साथ काम कर रही है जिसके कुछ सकारात्मक परिणाम उत्तराखंड के अल्मोड़ा जनपद के ग्राम थामण और बासुलीसेरा में दिखाई देने लगे हैं। बृहद वृक्षारोपण और नौलों के स्रोतों के विकास के फलस्वरूप भूजल के स्तर में सुधार बहुत उत्साहित करता है और इस दिशा में संकल्प के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है ।